📕 राख’ नहिं अबैत छैक बहुत लोक केँ
बेसी काल वस्तु राखय काल खसि पड़ैत छैक। कखनो कोनो अपना देह-व्याधि कखनो कोनो मनोव्याधिक कारणें मनुष्य उपलब्ध वस्तु के संयोगै मे अयोग्य भ’ जाइत अछि। साधारण संँ ल’ क’ विशेष सब लोक केँ गुण आ कौशल प्राप्त भ’ गेला पर तकर घमंडक कारण। ध’न पाबि गेला पर धनक गौरव।विद्वत्ता ओ विशिष्ट यश भेटि गेला पर महान् भ’ जयबाक दर्प।
मनुष्यक गुणक क्षय,धनक क्षय आ अंततः यश प्रतिष्ठाक पतन एही बाटे होइत छैक आ बाढ़िक पानि जकांँ उतरि जाइत छैक।से बाढ़ि भने कोसिए’क किएक ने हो,एक दिन उतरैए जाइत छैक।
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गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडे.
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