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बांँचल रहओ पृथ्वी पर मनुक्खक किछु भरोस !
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गद्गद् विभोर कंठ संँ बाजि रहल छथि कतहु कोनो माय-बाप- ‘हमरो छथि श्रवण कुमार !’ रच्छ अछि। बांँचल रहओ मनुक्खक भरोस, एखनहुँ श्रवण कुमारक कथा। 🌳
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
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