सखी बहिनपा के उचितवक्ता डेस्कक चिठ्ठी

🌺🌺      सखी बहिनपा !
                विशेष ध्यानार्थ :
  श्रीमती आरती जी
  श्रीमती छाया दाइक नामे उचितवक्ता
    डेस्कक एक टा फेसबुक चिट्ठी।
   🌿 आदरणीयाँ सखी बहिनपा !
अहाँ लोकनि हमर एहि चिठ्ठी पर ध्यान दी तँ हमरा बहुत संतोष हयत। 
  आब अहाँ लोकनि केँ इहो चाही जे दिल्ली एन सीआरक मोहल्ला सोसाइटी सभ मे मैथिल परिवार सभक यथाशक्य पहिचान करैक किछु ई यत्न करय। यतवे संभव हो ओतबे ‘सामा चकेबा’ सन पावनि क’ सकी तकर व्यौंत मे लागी से आग्रह।जँ करैत होइ तँ जानकारी द’क’ ख़ुशी दी।
   अहाँ लोकनि ओतअक स्त्रीगण समाजकें सेहो एहि सामा चकेबा, परम्परा,एकर भावुक संदेश संँ परिचित करबैक ओरिआओन करिअनु जाहि सँ कि ओहो लोकनि सामा चकेबा बनबथि,गीत गाबथि,सामा खेलाइथ आ समदाओन संगे जोतला खेत (मुहल्ला/भने सोसाइटीक पार्कक कोड़ल फूलक क्यारीए मे) जा क’ भसाबथि…।
    हमरा सोसायटी मे एत’ एको दिन नै देखलौं। आखिर एतहु तंँ छथिहे “सामा चकेबा बहिन दाइ” समाजक लोक आ परिवार !
    सामा चकेबा केँ हम मात्र खेल नहिं बुझैत छिऐक।मैथिल ललना वर्ग लेल ई एक टा अओर कला-मूरूत कला करबाक कल्पना,कौशल ओ कुशल विन्यास सेहो थिकै। के केहन सुन्नर आ जीवन्त सामा बनबैए तकर वार्षिक स्पर्धा होयबाक चाही नव पीढ़ी लोक मे! बेटीए -बहिन वर्ग किएक,बालक किशोर सेहो किएक ने शामिल होइथ ! मधुबनी,मिथिले चित्र कला सँ संतुष्ट किएक भ’ जाइ गेलौंहें। सामा चकेबा मूर्ति शिल्पक कलात्मक सौंदर्यक अवधारणा धरि जयबाक चाही।न’व पीढ़ी बेटी वर्ग ऐ मे उल्लास पूर्वक भाग लेथि।
स्पर्धा मे उत्तीर्ण नवतूर सामा-चकेबा कलाकारक विधिवत सम्मान समारोह होअय। एहि प्रसंग मे हमरा तत्काल जे किछु अतिविशेष प्रशस्त चित्रकार संजू दास जी,रानी झा जी,मनीषा झा जी आदि मन पड़ली हय।हिनका लोकनिक सान्निध्य ओ मार्ग दर्शन मे किछु ठोस कार्य योजना बनयबाक चाही। 
   हँ,महानगर संँ महानगर जा क’ समारोह कर’ लागब तँ एहन सुन्दर संस्था कतोक आने संस्था सब जकाँ जल्दीए कोनो आर एक टा खाऊ- पकाऊ एनजीओक संकीर्ण राजनीति ओ अवसरवादी नेता सभक ‘समारोही संस्था’(अखाड़ा)मे बदलिजाएत। देखै जाएब। समय समय पर ई आत्म परीक्षण सेहो करैत रहब नीक रहैत छैक।
   वास्तव मे सामाजिक गतविधि लेल होइत कोनहुँ कार्यकलाप मे एहन विशेष आनन्द सब के अनुभव भेल हयत (जे लेखक छी),जे कोनो बहुत सुन्दर कविता कथा कि उपन्यास लिखि रहल होइ। गायक वा आन कला संँ जुड़ल व्यक्ति के ओही स्वभावक सुख गयबाक सुनबाक।अपने रुचिक आनन्द भेटैत रहै छैक।
  गाम मे अपन “साझी आश्रम न्यास”क आयोजन सब करैक दरमियान हमरा जाहि स्तरक संतोष ओ ख़ुशीकअनुभव होइत रहल तकरा कहि सकब संभव नहिं। दिव्य।
    किछु गोटय कें मन मे अबस्से इ प्रश्न अबैत हेतनि जे बात हम राज नीतिक नेता सब जकाँ संस्था केँ फरमा रहल छी से एतबा अपने किएक ने क’ दै छिऐ जे अढ़ा रहल छिऐ ? ठीके। किन्तु से हम नै क’ सकैत छी।हमर सीमा  अछि।
  हमरा मोहल्ला मे एहि ठाम सामा भसाओन नहिं भेल ! पहिने एतेक नै अखरै छलय। ऐ बेर बड्ड खलल।
सस्नेह,
इति,
अहाँक -
                    #उचितवक्ताडेस्क।
(गंगेश गुंजन)१६.११.'२४.

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