🌻 गाम -नाम !
आब इहो तँ फेसबुक पर अतिए भ’
रहलय और बाबू लोकनि !
आइ भोरे-भोर एक टा आप्त युवकक फ़ोन आयल :
‘सर अपने तंँ मिथिला विशेषज्ञ छियै, मिथिलाक सब गाम कें जनैत छियै…’
‘से कोना बुझि लेलौं महराज? एतेक टा मिथिलाक सब गाम कें चीन्हब अहाँ कें साधारण बात लगैए? बल्कि बेसी काल तँ मनुष्य अपन गाम कें नीक जकाँ चीन्है सँ पहिनहि ‘कमला कात’ चलि जाइए। तखन हँ,यथाज्ञान बहुत गाम हमरा बुझलो अछि। कहू।’
बीचहि मे हुनका टोकब आवश्यक छल। अपना द’ ‘मिथिला विशेषज्ञ होएबाक’ एहन विश्वास सुनि क’ हमरो मे ज्ञान घमंड किएक ने आबि सकैए,बयस भ’ गेल तें की ? ख़राप होइक कोनो बयस निर्धारित थोड़बे छै। महान उर्दू शायर तँ कहियो गेल छथिन : ‘आदमी को बिगड़ते देर नहीं लगती है।’ ई बात जे हम कहलियनि ताहि पर ओ कहलनि-
‘जी,से तँ सहिए कहलिऐ अपने। असल मे हमरा जानब छल जे मिथिला मे ‘ढीठ भगवानपुर कत’ छैक?’
‘ढीठ भगवानपुर ?’हम आश्चर्ये पुछलिअनि।
‘जी। फेबु.पर एक गोटय अपन पोस्ट मे अपना गामक नाम सैह लिखलखिनहें।’ ओ कहलनि।
‘भीठ भगवानपुर तंँ सुनल अछि यौ।ढीठ भगवानपुर पहिले-पहिल अहीं मुँहें सुनि रहल छी।नीक गाम छैक।हमरो गामक कुटमैती छैक।
ओ गोर लागि क’ वार्ता समाप्त कयलनि।मुदा ऐ प्रसंग जानै वास्ते हम तखनिह सं व्यग्र भ’ गेलौं।ताक’ लगलौं। जिज्ञासा मे फेसबुक अनुसंधान कयल तँ वैह भेटल- ‘भीठ भगवानपुर।
एखन धरि ई बात कय बेर बाजि- भूकि क’ हम फेसबुक पर पर्याप्त अधलाह बनि चुकल छी -जे कोनो पोस्ट पर,खास क’ ऐ प्रकारक संवेदनशील पोस्ट पर एना नै हड़बड़ाइ। परंच के सुनैए।
अपन गाम-नाम सब के अति प्रिय रहैत छैक।तकर नाम अशुद्ध पढ़ब- सुनब बहुत अप्रिय लगैत छैक। हमर एक टा समवयस मसियौत मुंँह टेढ़ टूढ़ क’ क’ नेना मे हमरा गाम कें हँसि क’ दूसि देने रहथि तँ कय बर्ख हम बड़की मौसी ओत' गेबे नहिं केलौं।मांँ कतबो नेहोरा कयलनि तथापि नहिं।अपन यैह अनुभव आ असंतोष कहबा लय हम युवक कें तुरंत फ़ोन कयलिअनि तँ जीह कूचैत पछताइत कंठे गछलनि-
‘जी,सर भीठ छलै,ढीठ नै। आब ध्यान रखबै। गोर लगै छी।’ ▪️ गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडे.
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें