🎨 बात छैक जे...
.
प्रेम ल’ क’ बेसी दिन घऽर मे बैसल बन्द रहि गेलौं तँ ओहो रेफ्रिजरेटर मे राखल कोनो वस्तु भरि रहि जाएत जे टटका रहबाक आभासक भ्रम तँ देत किन्तु प्रतिदिन बासि-तेबासि,पीअर- कारी कुद्रूप भेल चलि जाइत रहत।
प्रेम कें दलान पर सेहो बैसाओल करिऔ।ओकरा नातिन-पोता जकाँ कन्हा पर ल’ क’ कउखन गाम आ सब टोल सेहो टहलाओल करिऔ।स्वस्थ्य,सरस ओ सुन्दर बनल बिहुंँसैत रहत-प्रेम। 🌿
(क्रमशः)
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें