❄️ बात छैक जे…
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असकरुआ एकान्त प्रेम कनी दिन मे रोगाह भ’ जाइत छैक। बाढ़ि चलि गेलाक बादक कोनो खाधि मे जमा डबरा में पानि जकाँ सड़ि क’ कादो,फेर सुखा जाइत छैक जेना कय टा नीक सं नीक लगैत विचारो।
(क्रमशः) 🌫️ गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
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