ढेकार आ बुद्धिजीवी ढेआर !

🌓        ढेकार आ बुद्धिजीवी-ढेकार!
                           ▪️
लागि रहल अछि जेना मनुष्य सब भोग क’ चुकल हो’ आ आब खा-पी क’ अघा गेल हो। चारू दिस समाज अपन-अपन,‘ढेकरि’ रहल अछि। क्यो देश ढेकरैए,कोय धर्म ढेकरैए,कोय ‘भाषा’ तँ कोय प्रान्त ढेकरि रहलए तंँ कोय लोकतंत्र आ राजनीति ‘ढेकरि’ रहलय।
  ऐ सबसंँ ऊपर विश्वबोध सँ आकंठ  अघायल अधिकाँश बुद्धिजीवी वर्ग अपन ‘हिन्दू-मुसलमान-विचार ढेकरि’ रहल छथि।
              🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻                    
                     गंगेश गुंजन                                      #उचितवक्ताडेस्क।

टिप्पणियाँ