नव भनसियाक करछुक टनटन

❄️❄️      न’व भनसिया: करछुक
                        टनटन ! 
                         !🪷!
एक ठाम भाषा आ प्रकृति पर सामान्य चर्चा होइत रहैक तँ हमरा कहना गेल जे जतेक पवित्र आ प्रांजल मैथिली भाषा में बधाइ वा आशीर्वाद लगैत छैक तते अँग्रेजी मे नहिं।’
‘ई अहाँ लोकनिक फालतूक मैथिल घमंड अछि। अंग्रेजीक सोझाँ हिन्दीक तँ किछु गिनतीए नहि छैक। अहाँ मैथिलीक बात करै छी!’
 एक टा युवक तेना उत्तेजित ऊंँच स्वर मे आपत्ति कयलनि जेना हुनका कोनो पचहिया बिढ़नी काटि लेने होइन। हालहि मे ओ मगध विश्वविद्यालय संँ एम ए पास अंग्रेजी सेकेण्ड क्लास भेल छथि। हुनक मुख मुद्रा सँ तँ एक क्षण लेल लागल जे आब जँ किछु कहबनि तँ ओ युवक कदाचित हमर नरेटीए ने ध’ लेथि। सत्य कही तँ ई सोचि क’ कनिक नीको लागल जे युवक जबरदस्त भाषाभिमानी छथि।भने अंग्रेजीए किन्तु वफादारी मे तकर आशीर्ष सिपाहीए बुझा रहल छलाह।
     सामान्य गपशप काल मे सब टा टोटले बात पर गप तँ नै ने होइत छैक।परन्तु किछु महानुभाव अनचोखहि मे अपना व्यवहार सँ सौहार्द भरल वातावरण कें पर्यंत गाछक डारि जकाँ दोमि देताह / देतीह एहिना। असल मे कय बेर मनुष्य बुतें मोहाबिरा दोहरा जाइत छैक। ऐ प्रसंग मे अंग्रेजी सेवी- “न’व भनसियाक करछु बेसी टनटन बाजि गेलनि।”               😝
                  गंगेश गुंजन 
              #उचितवक्ताडेस्क।

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