फेसबुक दलान पर लीला

🛖||              फेसबुक दलान लीला   
      ई जे अपना सभक फेसबुक दलान अछि ऐ पर किछु महराज साहेब टाइप सेहो बैसैत छथि की ? ओ फेसबुक मित्र के मित्र नहिं,अपन ‘रैयति’ जकाँ बुझै होइथि !
   हुनक पोस्ट कें लाइक आ ताहू मे प्रशंसा करैत प्रतिक्रिया लिखै मे अहाँ कनिको देरी कयलिअनि कि हुनका एँड़ी संँ चानि धरि लेसि दैत छनि। कोनो घड़ी ओ अहांँकें फ़ोन सँ जवाब तलब क’ देताह। महोदयक बजबाक टोन सँ सद्य: बुझाएत जेना ओ कहि नै रहल होइथ चेता रहल होइथ -
‘अहाँक ई सपरतीब ? हम्मर पोस्ट केँ इग्नोर करब ?’
                           नोट :   
[ ई पोस्ट पूर्णतः अपन परम मित्र समाधान प्रसाद जीक टटका-टटकी भोगल यथार्थक हुनके टेलिफोन व्यथा-कथा सुनलाक करुणा पर आधारित अछि।  ]
                                 😜 
                            गंगेश गुंजन 
                     #उचितवक्ताडेस्क। 

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