कहबीक तरहत् पर : भाषा प्रेम

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कहबीक तरहत्थी पर : भाषा प्रेम आ अभिमान !                    📕
     कय काल आभास होइए जे मैथिली प्रेम आ अभिमान आब ‘बानरक हाथ मे नारिकेर’क मोहाबिरा मात्र मे भेटैए।
  ओना सौभाग्य जे ऐ कहबी सँ सर्वथा बाहर कतोक मैथिली प्रेमी भाषाभियानी सेहो वास्तविक निष्ठा आ समर्पित भावें अपन मातृभाषा कार्ययात्रा करैत रहैत छथि।  
   सत्य पूछी तँ सैह सब आदर आ यथाशक्य सहयोगक योग्य छथि।                                        ▪️ 
                      गंगेश गुंजन,
                   #उचितवक्ताडे.

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