🌜💐🌛 ‘अशौच’
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‘एम्हर की खास लिखलिऐक अछि सर ? अर्थात् कोनो कथा,कि उपन्यास !’
कोनो जुनियर लेखक विनम्रता सँ एक टा पैघ लेखक कें पुछलखिन।
‘ऐ मिझायल मूड मे गपशप !’ ओ पैघ लेखक कनी आर पैघ होइत शिथिल सन जवाब देलखिन।
‘शीर्षक तंँ जबर्दस्त भेलय सर।’ नव लेखक उल्लसित भ’ बजलाह आ आग्रह करैत कहलखिन- समय हो तँ कृपा करितिऐ कनी, एक रती सुनाइयौ दितिऐ।’ नव लेखकक स्वर मे हुनका किछु विशेष आप्तता बुझयलनि। कहलखिन -
‘बेस ! ऐ मिझायल मूड मे गपशप ?’
पूछैत जकाँ ई कहैत लेखक कात मे राखल पनबट्टी खोल’ लगलाह। एक खिल्ली पान गलोटलनि।कनी चून चटलनि,किमाम- सुपारी-ज़र्दात्यादि मुखस्थ करैत सुभ्यस्त होइत रहलाह।एम्हर नव लेखक आतुर उत्सुक आसाबाटी मे बकोध्यान लगौने जे आब सुनायब प्रारंभ करताह। मुदा ओ तँ पानक टटका सेप घोंटैत-सैंतेत रहलखिन।
नव लेखक कें धैर्य नहिं रहलनि तँ अंत मे अधीर होइत कहलखिन:
‘आब सुनाओल ने जाउ सर !’ ऐ बेर ओ
पैघ लेखक विस्मयक भाव सँ पुछलखिन- ‘कथी ?’
‘ओ कथा सर।’नव लेखक अकबकाइत मुदा परम विनम्रते सँ कहलखिन।
‘ऐ मिझायल मूड मे गपशप ? तखने तँ सुना देलौं।’ पैघ लेखक निश्चिंत भाव संँ कहलखिनतँ नव लेखक आर घबड़ायल अस्तं-व्यस्त होइत कहलखिन-
‘मुदा ई तँ कथाक शीर्षक छैक ने सर ?’
‘से तंँ अहांँ बुझलिऐ। हमर तँ सौंसे कथे छल।से सुना देलौं!’
हतप्रभ भेल कोनहुना ‘आज्ञा दिअ’ सर’ कहैत नव लेखक,पैघ लेखकक पयर छूऐ लय निहुँर’ लगलाह कि हुनका रोकैत कहलखिन:
‘ हां-हां ! एखन गोर जुनि लागू। एखन हम राष्ट्रीय अशौच मे छी।’
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(संदर्भ: पहलगाम दु:खान्त)
#उचितवक्ताडेस्क।
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