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बुढ़ा-बुढ़ी-वार्ता !
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बुढ़ा : अकच्छ भ’ गेलौं ।
बुढ़ी : की भेल?
बुढ़ा : कारी मोसिक बदलि क’ नील
मोसिक रीफिल भरिओ देलिऐ। तैयो
कारी लिखा रहलय।रीफिल दै मे
दोकनदरबा कहीं ठकि तंँ ने लेलक?
बुढ़ी :माने दोकान वला हमरा ठकि लेलक?
हमरा??अर्थात् हम एतेक अवढंगाहि (उचिते,बुढ़ीकें ईबात बड़ अप्रिय लगलनि)
बुढ़ा : नै-नै से हमर अभिप्राय नहि अछि।
अहांँ कें ठकि ले’त से ककर द्दीन छै।
बुढ़ी : अबस्स।तखन अही मोसि सँ लीखू।
समस्या कोन?आ हम पूछै छी जे
दुनू मे अन्तरे की छै ?
बुढ़ा: अंतर हमरा अहाँ जकाँ …।
अर्थात बुझल जाव :
बुढ़ही जेहने चक-चक गोर
तेहने कारी खट-खट बूढ़ा।
असली परिस्थितिक मर्म ई छलै! °
सुनितहिं बुढ़ी अनमन मधुस्रामनी प्रात
जकाँ लजा गेलीह। फेर तेहने मोहक
मुसुकयली जेना दुरागमन बाद
विदागरी भ’ क’ पहिले बेर कहिओ
१९६७ ई.मे नैहर जा रहलि होइथ…।
…….😆😝…….
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
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