🌿🌿🌿🌿🌿 किछु दू पँतिया
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हमरो सन अवढंग भेटत क्यो कलाकार, कवि भरि मिथिला
हृदय चुका क’ स्नेहक दामे जे बदलेन
केने हो मरुथल।
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हेलहु नहि अबैत छल अपना,हे’लि
सकी जे द’सो डेग
के कहलक कूदै लय तै पर,मनोरथक
ऐ महासिन्धु मे
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और्दौ सँ बड़ बेसी,एसकर एकान्ते,
भे’टल
सुनने रहिऐ जिनगी बड़ आनन्द भरल
होइ छै !
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एना बेसुध चलब जिनगीक बाट पर
नहिं,चलै छै
दुनिया मे रहबा लय,अलगे तरीका
होइत छैक।
🌿 गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
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