अनटोटल पर : ई जे अपन मैथिली

📕।                            अ न टो ट ल !
                                        🌿
 ई जे अपन मैथिली !
  अपना सुभीताक मोताबिक भाषाक कलाकारी करैत कत’ कहांँक लैटिन कि अंग्रेजी भाषाक ‘टोटल’ शब्द कें अप्पन भाषिक तालु-जिह्वाक,रुखान-बैसला, आड़ी-रंदाक प्रयोग आ अभ्यास संँ ओकरा 'अनटोटल' बना लेलक। कह' लागलि :
“बड़ अनटोटल बजैत छथि महानन्द चौधरि !’ कह’ लगलैक।
    आगाँ आरो जरूरति भेलैक तँ अनटोटलो के मैथिली ‘अनटोटलाह’ बना लेलक। बाज’ लागलि : 
“सूरति ठाकुर सन अनटोटलाह लोक सं तंँ दस लग्गा काते रही।’’
    एहि दुहुक व्याकरण-रूप की छैक से तँ जानथि वैयाकरण महाजन लोकनि। हम तंँ जे लेखक जकांँ बुझललिऐक ओतबे कहलौंहें।      
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                   गंगेश गुंजन 
              #उचितवक्ताडेस्क.

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