१.
के पूछत जे ‘कोना छी’ कहाँ छथि से लोक आब
छो’ट छिन ऐ बात केँ एतबो ने बूझी छोट छिन।
३.
मनुखक स’ब मनोरथ होइछ कोनो ने कोनो यात्रा
पूर्ण भेल तंँ गाम चलि गेलौं नहिं तँ आगाँ मरुथल बाट
४.
हम ओकर अयना बनि गेलौं
ओ हमरा ओहार बना लेलक।
५.
हमर सुनसान कें देखलनि तंँ भय सँ भागि गेलाह
नीके भेल बांँचि गेल कुटिल नज़रि सँ हमर एकान्त।
६.
बात सँ बात निकलैए जहिना
बाट जीवन मे भे’टैए तहिना
किछु न निश्चित अछि न निर्धारित
यत्न सँ अपने भेटै’ए, ए हि ना।
७.
रही तेना ऐ योग्य पृथ्वी हम हरदम सब काल
मरणक स्वागत करै योग आ एहि सृष्टिक अंतिम सत्कार।
८.
जीयै लय तंँ पहिनहुंँ मानै छल एकरे लोक
गामो आब मरय चाहैए स्वर्ग लगै छै शहरे
९.
अंतिम क्षण मे सब कें प्रिय महानगरे लगैत छै
कटु तं छै इ सत्य किन्तु छै यैह आब छै तंँ छै। गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
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