गामक आनन्द शहरक आनन्द

गामक बसात बहैत मेघक घ’न अन्हारक आनन्द ! एकर पएर धोआओनो नहीं हयत बसात बहैत एहने घ’न मेघक शहरी अन्हारक आनन्द !  
                   गंगेश गुंजन 
                 #उचितवक्ताडे.

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