📕 कर्पूर-यथार्थ काल मे कवि !
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एखन लेखकक भाषा
ख़ाली टिन जकाँ बजैए- झर्झन् झन्न्
तेल घी सँ रिक्त
सत्व,संदेश विहीन !
जेना कोनो छौंड़ा
राहठिक डँटी सँ बजा-बजा क’ टीन सङ्गे
खेलौड़ क’ रहल हो !
ऐ कर्पूर-यथार्थ परिस्थिति काल मे,
चीन्है-पकड़ैक चेतना-चेष्टा करबाक बदला,
बेसी रचनाकार एकर भोग क’ रहल छथि…
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गंगेश गुंजन
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