'अयाची टोल'
मैथिली मे आई सं ई हमर न'व ब्लॉग अपने लोकनिक सम्मुख प्रस्तुत !
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शोभायात्राक हाथी ( कविता)
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बहुत बनलौं हम
शोभायात्राक हाथी !
भरि जन्म बनलौं,बनहि पड़ल -
कखनो जीविका,कखनो समाजिकता मे से
शोभा क हाथी।
बनहि पड़ल तं आब,
ओइ पशुक पीठ बनब जकरा पर लादि क’ कहियो अनलनि अतीत सं
ज्ञान-वैभवक अलभ्य पाण्डुलिपि सब पं.राहुल सांकृत्यायन !
ज्ञान-वैभवक अलभ्य पाण्डुलिपि सब पं.राहुल सांकृत्यायन !
जेना ल’ गेलाह भारतक विद्या भंडारक अंश भरि क’
ज्ञान पियासल चीनी पर्यटक ह्वेनसांग अपन धोकड़ा।
कंप्यूटर मे पर्यंत अंटि नहिं सकल बोध ओ विवेकक महा संसार,जाहि मे
बौआइत कोनो ज्ञान विज्ञानीक कान्ह-कांख मे लटकल हिड़ला झुलैत
बौआइत कोनो ज्ञान विज्ञानीक कान्ह-कांख मे लटकल हिड़ला झुलैत
यात्रा करैत रहब भरि ब्रह्माण्ड !
धोकड़े बनब आब हम।
बनहि पड़ल यदि किछु आब !
बनहि पड़ल यदि किछु आब !
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-गंगेश गुंजन । १४.०१.२०१८ ई.
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