बाल साहित्य ओ साहित्यकार पर किछु विचार ।

मैथिली बाल-साहित्य सेहो न'व रूपमे आधुनिक आ  समृद्ध हो से सभक अभिलाषा अछि। मुदा आधुनिक
ज्ञान-विज्ञान ओ संचार संजालक एहि युगक अपेक्षाक अनुकूल,बाल साहित्यक परिसर चिह्नित परिभाषित नहि अछि। बाल-साहित्य आखिर की ? केहन ? से स्पष्ट होयबाक चाही।रचनाकार वास्ते तं खास तत्परता‌ वांछित अछि।
   एकाधिक नीको रचना पढ़ला पर बाल-कविता/साहित्य पर अपन भाव प्रकट करै में तें, हमरा बड़ दुविधा होइत रहैए। जेना हालहि‌ मे चंदन जीक कविता पढ़ि क’। बेसी काल आभास होइत छैक जेना सबटा एकहि बयसक बाल वर्गकें लक्षित कविता हो। तें, बेसीतर विरोधाभासी भ' जाइत छैक।
   हमरा जनतवे बाल-साहित्य-लेखक लेल किछु कहबा काल ई अनिवार्य जे हुनक लक्षित बाल वर्ग कोन छनि, से दृष्टि स्पष्ट रहबाक चाही।अर्थात् बालिका-बालक वयस-वर्ग समूहक बोध।
  मोटा-मोटी बाल वय समूह ई भ' सकैछ-३-५,५-९ आ ९-१३ वर्ष। वयस-समूहक ई निरूपण, हमर अछि।शिक्षा शास्त्री लोकनि आर बेसी वैज्ञानिक निर्धारण क' सकैत छथि।
दोसर बात जे,
'बल धकेल' लीखल कोटिक कविता सेहो,बहुत आबि रहलय बाल काव्य/साहित्यक नाम पर।एंकर स्वस्थ विकास हेतु, प्रारंभहि मे एखनहि चेतय पड़त।
   बाल-कविता तं गार्जियन आ गुरु पर सेहो भ’ सकैत छैक। होएबाक चाही।शिक्षा शास्त्री लोकनि समेत समस्त रचनारत बाल-साहित्य लेखकक सम्मुख हमर ई विनम्र प्रस्ताव अछि।
    विचारार्थ।
-गंगेश गुंजन
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