पैघ आ महान
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अपना बल-बूता,बुद्धिबल कर्मठता, दूरदर्शिताक गुण ओ महत्त्वाकांक्षाक बल सं पैघ तं बनि जा सकैये मनुष्य
मुदा एतबे गुणक बले ओ संसार मे महान् नहि बनि सकैत अछि,भने ओकरा अधीन मे प्रचार-संचारोक सामर्थ्य रहौ।
मनुष्य कें महान् बनबैत छैक संसार मे निरंतर ओकर त्यागमय उज्ज्वल कृतित्वक यश-प्रवाह,लोक आ समाज।
महान समाजे टा बनबैत छैक मनुष्य कें।
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२६.१०.’१७. क' हमर लीखल डायरी सन।
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