गनतंत्र दिन !

बड़ दिव जनता !
*
गुदरी-चेथरी सीबैये
बड़ दिब जनता जीबैये
जेहने ई पवित्र पावनि
तेहन अछिन्जल पीबैये
नब मलिकाना ढब पसरल
घोड़ीक् घास छीलैये
कहियोक राजा आ जमिदार    
आ अंगरेज सँ मीलैये
जखन चलय परिवर्तन चक्र
सब सं अवसर छीनैये
अपन बिलासी बजटक भार
जनताक कन्हा पटकैये
सुनैत छी आब अपनो देश
मंगल ग्रह पर गेलैये

         2.

भरि संसारक यूरो-युद्ध
लोकक    भूखें   लड़ैये
दाना-दानाक लोक बेहाल
गहुम गोदामे  सड़ैये
देशक नायक सभा समेत
ध्वजा ऊँच फहरबैये
लोकगीत-नादक नामे
रॉक एन रॉल करैये
गाम भरिक कएक घर मे
दीपो कहाँ आब जरैये
सबटा  अछि मिझाएल मुरुझल
दिल्ली जगमग करैये
संभव छैक पटनो हो इजोत
गाम बिहारक कनैये
ई महान राष्ट्रक त्योहार
धरती रौद सं जरैये
कर्ज़ मे लोक आकंठ डुबल
ख़ेतिहर जन सब मरैये
अमरीकाक विशेष डॉलर
फ्राँस मे यूरो फरैये

         2.

हमरा गामक बाध समस्त
धहधह जेना कि पजरैये
मिथ्या उमेदाश्वासन
बाट देखि लोक मरैये
कहिया चलल रिलीफ गामक
देखी कहिया पहुँचैये
छीन लेल  से बड़ सुभ्यस्त
ठाढ़ रहल भीख मँगैये
शहरक सब लाल बत्ती
भीखक हाथ मे फरैये
अजुका दिनक खोराकीक खोज
साधारण लोक लड़ैये
   3.
देश शीर्ष पर होइत परेड
चैनल सब दरसबैये
हरेक पल डेगक झाँकी
दुनिया भरि झलकबैये
ई नहि अपनो देखय ओ
जे किछु नाटक करैये
केहन पराभव  सोझाँ मे
जीअय लोक ने मरैये

         4.
शक्ति अछैत विरुद्ध सोझाँक
तैयो किएक ने लड़ैये
भरिसक नैतिक दुबिधा-द्वन्द्व
सब संबंधीए लगैये
तहियाक समय छ’ल बूझल
अन देशी थिक छ'लैये
आइ तं ई नबका अंग्रेज़
मसियौत  सन लगैये
तें एहनो महान ई दिन
आत्मा धरि नै उतरैये
हो जिनकर ई देश रहओ
हमरा तं नै अरघैये
गुंजन सब युग आब बुझाय
मुँह देखि मुँगबा बांटैये
***
-गंगेश गुंजन.

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