फेसबुक पर अधिकांश ‘मैथिली आ मिथिला-प्रेमी’ कोनो अशिक्षित,अवसरवादी राजनीतिक दलक C टीम B टीम जेकाँ काज करैत’ बुझाइत छथि। ई मैथिली-विकासक विरोधी अतः निकृष्ट प्रवृत्ति थिक।
ढोल बजा क’ जंगली जानवर तं भगाओल जा सकैये। कोनो आन्दोलन आ अपेक्षित समाज नैतिक परिवर्तन नहि कयल जा सकैये। शं।श
जनिका अपन चौहद्दीओक बोध नै से ‘मैथिली-लेखक- साहित्यकार’ कें हुनक काज अढ़ा रहल छथि आ एकरे मैथिली आन्दोलन मानि लेबाक काज मे बाल-पुरुषार्थ देखबै मे मटोमाट छथि।ओहन समस्त मैथिली आन्दोलन कर्ता कें हमर क’ल जोड़ि विनती अछि-
हमरा सन साधारण लेखकक प्रति मन मे सम्मान नहियों रहओ मुदा आदरणीय गोविन्द बाबू,अमर जी, रामदेवजी आदि सदृश् लेखक-कवि एखन प्राणवंत छथि।हुनका लोकनि कें तं हमरा सब सम्मान सं राखी।परोक्षो रूपेँ हिनका लोकनिक 'अनादर’ तं नै होयबाक चाही।
एकर बड़ दु:ख अछि हमरा जे साहित्यकार पर,मैथिली आन्दोलन मे हुनक भूमिका पर अनर्गल परामर्श सभ सं आजिज आबि क' एहन अप्रिय टिप्पणी कर’ पड़लए। तथापि ई किनको प्रति व्यक्तिगत नहि । एकरा एहन अवांछित प्रवृत्ति पर भेल, हमर क्षोभक प्रकाश मात्र मानी। सोची। जंचय तं बड़ दिव। नहि तं लोकतंत्र की जय !
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गंगेश गुंजन
४ फरवरी,२०१८.
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