प्रेमक कहरिया छी

पालकी ऊघै   छी प्रेमक,   कहरिया छी
आइ धरि तें अपनो गाम में  बहरिया छी।

नगर-महानगर  ने मानल कहियो  अप्पन
गाम सब दिन कहैत रहल जे शहरिया छी ।

आब   बड़   सोचै छी  केलौं तं की  केलौं
केहन विचार भेलौं हम कोन नज़रिया छी

सब चैनल अपने अपने चुनने‌ अछि  देस
आब चैनेल   नहि खुफिया  खबरिया छी।

घ’र  बंटवारा में  सबके  भेटलै   इच्छाक
रच्छ  दच्छिन नहि हमर  उतरबरिया छी।

देस में   एखनो ‌ भरि वर्ष बहैये   पछवा
सभ सत्ता सम्हारनार दछिनबरिया  छी।
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गंगेश गुंजन। ०२.०४.’१८

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