दोहा मार्च 19, 2018 लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप आन्हर के सूझय न जग कामी कें न विवेक । निसांबाज देखय न श्रेष्ठ स्वार्थी लय सब एक।। * जीति लेब योद्धा सहस्र से संभव भ’ जाय। अपन मन के जे जीतय असली वीर कहाय ।। * -गंगेश गुंजन टिप्पणियाँ
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