चानपुराक छथि।’
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-सुखनारायन चौधरी जी कोन गामक छथि ? हुनका अहां चीन्हैत छिअनि?' हम ओहि व्यक्ति कें पुछलिअनि ।
-यौ,चीन्हैत तं नहि छिअनि हम मुदा चानपुराक छथि।’ओ तेहन आत्मविश्वास सं कहलनि जे मानहि पड़ल। तथापि जिज्ञासा भेल जे व्यक्ति के जनिते ने छथिन आ हुनक गाम बूझल छनि। पुछलिअनि-
-जे सुखनारायन चौधरी कें अहां चीन्हितो ने छिअनि, तनिक गामक नाम एतेक विश्वास सं कोना कहि रहलौंहें?’
-'एह,ऐ कहबा मे कोन तारतम्य ? सौंसे मिथिलाक जतेक चौधरी छथि से चानपुरे निवासी ने !’ ओ परम निश्चिंत मने कहलनि।
-'ई तं अहांक विचित्र निष्कर्ष अछि।पैघ गाम छैक से सुनैत छियै परंतु भरि मिथिलाक चौधरी चानपुरेक वासी होइथ ई तं बेस बुद्धि भेल।
-जांचि लिय’! हमर बात यथार्थ नहि निकलय तं हम अपन जनौ तोड़ि क’ फेक देब।’ सुनि क’ हमरा चुप्पे रहि जायब उचित बुझाएल।
ओही दिन सांझ मे एक टा पुरान अपेक्षित भेटि गेलाह तं ध्यान आयल जे सुखनारायन बाबू द’ हिनका अबस्से बूझल हेतनि। हम पूछियो लेलिअनि। ओ चोट्टहि कहलनि-
-चानपुराक बड़ प्रशस्त लोक छलाह,सुखनारायण चौधरि जी। से कियेक? बर्ख तीनेक पहिने गत् भ’ गेलाह ! आब नै छथि।’
हम निरुपाय फेसबुकिया विनम्र श्रद्धांजलि दैत चुप भ’ गेलौं।
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-गुंजन गंगेश।१२.९.’१८.
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