साहित्य मे प्रासंगिकता अक्टूबर 27, 2018 लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप 🌿🥀 साहित्य मे लिखल जाइत सभ सामयिक ओ यथार्थ सदा प्रासंगिक नहिं रहैत छैक। कालांतर मे रचनाक छुच्छ सामयिकता,ओहि भाषा- साहित्यक निंहेस भ’ जाइत अछि। 🌳 -गंगेश गुंजन २८ अक्टूबर,२०१८. टिप्पणियाँ
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें