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मैथिली मे प्रधान रूपें दू टा काज होइत देखाइत अछि
पहिल : भोर सं सांझ मिथिला आ मैथिली पर हकन्न कानब।
दोसर : मिथिला आ मैथिली पर हकन्न कननहार लोक वा समूह,संस्थाक परस्पर दुर्गंजन करब !
एक टा तेसर काज सेहो। मिथिला मैथिली भावनाक उद्गार मे थोक भाव सं पुरान पकठायल सं ल' क’ नव सं नव लोक लेखक-कविगण धुर्झार ग़ज़ल, कविता सं ल’ कथा ओ वैचारिक लेख लिखि रहल छथि। मोबाइले-मोबाइल ट्रांसमीटर भ’ गेल अछि। घर-घर स्टूडियो आ ओत’ सं लाइव प्रसारण। तकर दर्शक- श्रोता वर्ग के छथि,से साफ़-साफ़ कोनो पता नहिं। संभवत: प्रसारकक निजी मित्र मंडली ! भरिसक ड्राइंगरुम !
मैथिली-मिथिलाक नाम पर ई विषय परम गंभीर अछि। जटिल भेल चलि जा रहल अछि।
थाकथित एहि समस्त गतिविधि मे मिथिलाक साधारण जनता कत’ अछि?
** (उचितवक्ता डेस्क)
गुंजन.g. १२.९.’१८.
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