पाथर-पहाड़ !

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पहाड़ो पाथरक पेट सं हरदम झरने नहिं फूटैत छैक,भगवान् बुद्ध'क मुरूत सेहो निकलैत छैक।
।( फेसबुक पर)
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           । अक्षरक महिमा ।

पाथर तावते धरि पाथर रहैत अछि यावत् काल ओकरा पर अक्षरउत्कीर्ण नहिं कयल जाय।से भ’ गेला पर पाथर शिलालेख भ’ जाइत छैक।
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-गंगेश गुंजन 4 फरवरी, 2018.

-गंगेश गुंजन

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