पाग

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किछु स्रैष्टिक कारणें पाग पहिरब स्त्रीगणक लेल अव्यावहारिक होइत अछि,कोनो स्त्री-पुरुष विषमताक सामाजिकता अथवा पारंपरिक रीति,मान्यताक कारणें नहिं।ई बुझल जयबाक चाही जे, ट्रैफिक नियम रहितहुँ जेना कतोक स्त्रीगण कें सामान्यतया हेल्मेट पहिरबा मे असौकर्ज-असुविधा होइत छनि। सुकेशिता सेहो स्त्रीक प्राकृतिक सौंदर्य गुणे थीक।किन्तु सैह केश- विन्यास जं पुरुष क' लैत अछि तं हास्यास्पद बनि जाइत अछि।
    ओना जाहि मैथिल पाग पर अपना सब कें अभिमान अछि से संपूर्ण आत्मसम्मान तहिया बनि सकत जहिया पाग सबजन मैथिलक माथ पर स्थान पाबि लेत।एखन तं सीमित संकुचित संपन्न संभ्रांत लोक ओ पारिवारिक कर्मकाण्ड मात्र अछि जे आब संस्कृति कहि क’ बेशी काल सभा मंच सभ पर सम्मान-निवेशी राजनीतिक नवाचार जकां प्रशस्त कयल जा रहल अछि।
   आगां आब देखा चाही।  
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-गंगेश गुंजन।१९.११.’१८.

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