ग़ज़ल
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लिखैत-पढ़ैत चलि जाइ सरस्वति !
सुतैत-उठैत चलि जाइ सरस्वति !
०
अपनहुं कहिअय लोकोक सूनी।
सुनैत-कहैत चलि जाइ सरस्वति !
०
लोकेक दु:खक बासन फोड़ैत।
नोर हरैत चलि जाइ सरस्वति !
०
बिसुखय नहि हृदयक संवेदन ।
सहैत-कहैत चलि जाइ सरस्वति!
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अनुरागक मधुमय जीवन गीत।
सुनैत-गबैत चलि जाइ सरस्वति!
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-गंगेश गुंजन.
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