। बाढ़नि । जून 06, 2019 लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप बाढ़नि ! 🌿 कविता बाढ़नि थीक।माटिक आंगन-असोरा नहिं,मनुक्खक मन-संवेदनाक आंगन मे पड़ल माटि-धूरा बहारबाक बाढ़नि। 🌿 -गंगेश गुंजन टिप्पणियाँ
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