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।। भाषा ।।
कोनो भाषा ने ओहिमे लिखित आ लीखल जा रहल साहित्य सं जीवित रहैत छैक ने अपन कवि-लेखकक जयकार करैत रहला सं।भने विद्यापति-मनबोधे कियेक ने रहथु। भाषा-साहित्य कें जीवैत रखैत छैक ओहि भाषा भाषीक पढ़निहार, ओकरा प्रेम कयनिहार,व्यवहार,
कयनिहार लोक आ निज भाषाक स्वाभिमान सँ लैस आबादीक भाषाभिमानक गतिशील जीवंत स्वरूप।
कोनो भाषा ऐ सब सं जीयैत छैक आ आगां-बढ़ैत छैक। मैथिलीओ।
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(उचितवक्ता डेस्क)
गंगेश गुंजन
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