अनेरे आंखि डगडगा गेल कुटकुटाय लागल

   अनेरे डगडगा गेल आंखि,  
   कुटकुटाय किएक लागल। 
   कोना भ' गेलय धूआं आब
   ककरो नामक चर्चा।

               -गंगेश गुंजन 

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