दुपंतिया अक्टूबर 10, 2019 लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप ओ धरती कोड़ल-जोतल,जीवन भरि अपना जीबय लय। तामि-कोड़ि क' भाषा हमहूँ,तहिना जीवन गुजर केलौं। 🌾🌾 -गंगेश गुंजन टिप्पणियाँ
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