.....बढ़ू आगां चलू

  खसलौं कतोक बेर हम जिनगीक        बाट मे। 

  क्यो उठा क' कहलक-'चलू आगू'         सब बेर।


    गंगेश गुंजन।

टिप्पणियाँ