गाम भरि अगिलग्गी !

प्रेमक आगि लगै तं छैक कोनो एकहि घर‌ मे।                                                  भरि गाम किएक अगिलग्गी भेल लगैत छैक।

गंगेश गुंजन।(उचितवक्ता डेस्क)

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