नवतूरक चुमाओन !
युग-साकाँक्ष चेतना प्रतिभाक- नवतूर !
एकर बुझनुक सधल अभियानी डेग।
आँखि मे अजबे ज्योति !
मन मे सकल नवाकाँक्षाक विराट स्वप्न संसार,
जन्मौटी नेना जकाँ क' रहलए मायक गोदी मे अंगैठी मोड़ !
जेना बंसबाड़िक झोंझ संँ हुलकि रहलए भोर !
चुमाओनक डाला ओरिअबै जाउ माय-पितिआइनि।
आशीर्वाद देबा लय ठाढ़ होइ जाइ जाउ।भाउजि-बहिन दाय।
आ हंँ,बाप-पित्तीक रहबाक अधिकार आ शिष्टाचारक गुमान मे ई नै जे, बैसले रहि जाइ।अबै जाइ आउ। अबै जाउ ।
करैत जाइ जाउ, नऽव तूर चुमाओनक ओरिआओन ।
अबैत जाउ आउ ! आउ ! उत्सव, आनन्द आ उत्कर्ष पर एखन बाँचल अछि धान पर धएल दहीक मटकूरी मटकूरी,
केरा हत्था,नारिकेर,पान-सुपाड़ी।
सजल भरल चुमाओनक डाला !
कान ठेहुन सेदै लेल
रंगल-ढौरल पातिल मे जरैत दीप !
तामक सराय !
दूर्वाक्षत देबा लय अक्षत आ हरिहर दूभि !
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गंगेश गुंजन. पहिल जनवरी,२०२०.ई.
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