मातृ-पितृ प्रेम !

मायक प्रेम कविताक दृढ़ ललित छन्द जकां होइत अछि। पिताक प्रेम तकर व्याकरणक अनुशासन । 

        गंगेश गुंजन(उचितवक्ता डेस्क)

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