आदर्श पिता ओ गुरु एवं सन्तान।

आदर्श पिता वा गुरुक ई आकांक्षा        रहैत छनि जे सन्तान आ शिष्य हुनकर व्यक्तित्वक विस्तार होइथ।अपन अनुरूप वा अनुवाद कथमपि नहिं चाहैत छथि।-गंगेश गुंजन                                उचितवक्ता डेस्क

टिप्पणियाँ