वैह किछु बात रहत..

वैह किछु बात रहय मन मे बटखर्चा सन      एहन बिकट जीवन प्रेम सं गुजारि एलहुं।             ‌🍂🍂🍂🍂🍂🍂

                  गंगेश गुंजन

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