पानि लिखलक मनुष्य.... अप्रैल 13, 2020 लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप से मनुक्खे थीक जे प्रेम में पानि लिखलक तँ भरि पृथ्वी नदी,समुद्र ओ आकाश मे मेघ भ’ गेल। गंगेश गुंजन [उचितवक्ता डेस्क] टिप्पणियाँ
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें