। कपार पर हाथ । अप्रैल 29, 2020 लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप ओना तं डरबुक भेल तं कवि आ लेखक की भेल ? परन्तु जं विद्वान-आलोचको डरबुक,तखन तं आर बेकार। कुसंयोग देखू जे आइ-काल्हि प्राय: दुनू स्थिति,कपारे पर हाथ धरबाक बुझा रहलय। गंगेश गुंजन [उचितवक्ता डेस्क] टिप्पणियाँ
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