ज्ञकेहन विचित्र बात जे,

        केहन विचित्र बात जे,

जीवनक सब सं पहिने सुनिश्चित कयल गेल प्राप्य फल मनुष्य कें,सबसं अंत मे भेटैत छैक।    

                 गंगेश गुंजन

             [उचितवक्ता डेस्क]

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