थारी होइत अछि अवसर‌!

अवसर परसल थारी जकां होइत छैक। खा लेलौं तं बड़ दिव अन्यथा थारी धो-अजबारि क' अनका लेल रखा जाइत छैक।    

                   गंगेश गुंजन

           # उचितवक्ता डेस्क।

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