कविताक और्दा

पाठक कें कविता मे जाहि सीमा धरि ओकर पाठक (टेक्स्टक) वर्तमानता प्रासंगिक अनुभव होइत रहैत छैक, कोनो कविता के वैह आ ओतवे कालक आयु छैक। 

                    गंगेश गुंजन

              # उचितवक्ता डेस्क

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