कोरोना काल मे

कोरोना काल मे

पानि तं नै भ’ गेल सुखा तं नहिं गेलय हङमर देह-मोन ? 

मासक मास रौद-लू मे हजारो हजार कोसक सड़क पर छटपट कोरा मे विकल बच्चा लेने झरकि रहल माय जाइत देखि क',अचेत होइत जवान,ई फूटल फोंका पयरे मनुक्खक असहाय माथ पर निरंतर मोटा देखि क' दुनू आंखि सं शोणित नै बहि गेल रहितय ! एखन धरि। 

बिल्कुल्ले पानि तं नै भ’ गेल? सुखा तं नहिं गेलय हमर देह-मोन ?

                     गंगेश गुंजन 

                  उचितवक्ता डेस्क 

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