ऋतुक स्वाद

जे ऋतु छैक जकर ताहि मे र'स सेहो ओकरे होइछ रहओ आम बरमसियोओइमे स्वाद कत' कृष्णभोगक।

            गंगेश गुंजन #उचितवक्ता डेस्क।

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