संदेह !


मोनक संदेह केँ कुर्ता आंगी जकां देह सं खोलि क' खुट्टी पर नहि टांगल जा सकैए।कोनो नेना कें कोठली में बाहर सं बन्द क' केबाड़ पर जिंजिर जकां नहि चढ़ा देल जा सकैए। 
    यावत् रहैत छैक संदेह,देह मे भीजल वस्त्र जकां सटल बुझाइत रहैत छैक।
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                गंगेश गुंजन

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