मां मैथिलीक सौभाग्य और

                  ।।   मां मैथिली  ।।

मां मैथिली सन भाग्य देशक आन कोन भाषा के छैक ?                                                    अनेक संस्था-सन्तति बेटी-बेटा सेवा मे लागल छनि। माय मैथिलीक क्यो एक पयरक सेवा मे लागल छनि। क्यो दोसर पयर मे।क्यो एक हाथक सेवा मे क्यो दोसर मे।क्यो एक आंखिक क्यो दोसर। तहिना फराक-फराक दुनू कानक सेवा भ' रहल छनि। क्यो ओजस्वी कविता लिखि क' क्यो पोथी लिखि-छापि-छपा क',कोय सभा-सभा, मंचे मंचे विप्लवी उद्वोधन ओ भाषण द' क' तं क्यो पार्टी बना क'। क्यो वोटर/ मतदाता बनि क'।

    सतत समर्पित संतान सब लागल रहैत छनि। एहने तन्मयता सं कतोक दशक सं मांक सेवा भ' रहल छनि। मैथिली दशकों सं दुखीत छथि।

     कोनो संतान, ल'ग मे बैसि क' माथ सोहरबैत पूछितनि-'मां,अहांक मन मे कथिक क्लेश अछि ?'

   ओना,कोटि-कोटि मैथिली सेवक आ सेवा मे कनियों त्रुटि नहिं। कोटि-कोटि संतानक सौभाग्यशालिनी माय मैथिलीक मन में की छनि सेहो बूझल जैतनि। हिनक हृदयक विचार सेहो कयल जइतनि।

 देशक के कहय,बिदेशोक कोन भाषा के मैथिली सन सौभाग्य छैक ? 

                 #उचितवक्ताडेस्क।

टिप्पणियाँ