बूढ़ हरवाह

            बूढ़ हरवाह

खेत बूढ़ नहिं होइत अछि।

हरवाह बूढ़ भ' जाइत अछि।

रौद,पानि,बसात सेहो 

कहां होइअय कहियो बूढ़ !

बड़द आ मनुष्य बूढ़ भ' जाइए।

हरि संसारक मनुक्ख।

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                  गंगेश गुंजन

              #उचितवक्ताडेस्क।

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